मंगल दोष पूजा मुहूर्त 2026

मंगल दोष पूजा मुहूर्त: शुभ तिथियाँ, पूजा विधि और लाभ

मंगल दोष के कारण विशेष रूप से विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में तनाव, आर्थिक बाधाएँ और पारिवारिक समस्याएँ देखने को मिल सकती हैं। ऐसी स्थिति में ज्योतिषाचार्य मंगल दोष शांति पूजा करवाने की सलाह देते हैं। सही मुहूर्त में की गई मंगल पूजा से मंगल ग्रह का अशुभ प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।

उज्जैन में मंगल दोष पूजा के लिए मंगलवार और विशेष तिथियाँ अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष है, तो सही मुहूर्त में पूजा करवाने से इसके नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेष रूप से उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में की गई मंगल शांति पूजा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है और इससे जीवन में सुख, शांति और सफलता के मार्ग खुलते हैं। उज्जैन में मंगल दोष पूजा की बुकिंग करने के लिए कॉल करें।

क्या आपकी कुंडली में मंगल दोष है?

मंगल दोष निवारण पूजा उज्जैन

विवाह में रुकावटें, दाम्पत्य कलह, करियर में अड़चनें — इन सब का कारण कुंडली में मंगल की अशुभ स्थिति हो सकती है। सही मुहूर्त पर की गई मंगल दोष पूजा इन समस्याओं के निवारण में सहायक मानी जाती है। मंगल दोष पूजा किसी भी दिन की जा सकती है, लेकिन कुछ विशेष तिथियां ऐसी होती हैं जब इस पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक माना जाता है।

मंगल दोष का महत्व क्या है?

जन्मकुंडली में मंगल ग्रह जब पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो उसे मंगल दोष (मांगलिक दोष) कहते हैं। मंगल ग्रह युद्ध, क्रोध और ऊर्जा का कारक है। इसकी अशुभ स्थिति विवाह, स्वास्थ्य, धन और संबंधों पर गहरा प्रभाव डालती है।

मंगल दोष पूजा मुहूर्त क्या है? कब की जाती है ये पूजा?

मंगल दोष पूजा के लिए मुख्यतः 5 प्रकार के विशेष मुहूर्त माने जाते हैं। नीचे सम्पूर्ण जानकारी दी गई है:

1. भौमवती अमावस्या — वर्ष का दुर्लभ संयोग

जब अमावस्या मंगलवार को पड़े तो ‘भौमवती अमावस्या’ बनती है। ‘भौम’ अर्थ है मंगल ग्रह। यह संयोग मंगल दोष निवारण के लिए वर्ष का सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है। यह अवसर वर्ष में कभी-कभी ही आता है, इसलिए इसकी तिथि हर वर्ष पंचांग से ज्ञात करें।

2. सभी मंगलवार — नियमित मंगल दिवस

प्रत्येक मंगलवार मंगल ग्रह का अपना दिन है। इस दिन मंगल दोष पूजा वर्षभर कराई जा सकती है। मंगलवार को की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

3. नवरात्रि — चैत्र और शारदीय

चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति के साथ मंगल शांति की पूजा विशेष महत्व रखती है। नवरात्रि में पड़ने वाला मंगलवार मंगल दोष पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

4. श्रावण माह

उज्जैन में श्रावण माह में मंगलनाथ मंदिर की विशेष महिमा होती है। सावन के मंगलवारों पर मंगल दोष पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

5. अंगारकी चतुर्थी — मंगल + गणेश का दुर्लभ संयोग

जब चतुर्थी (चौथ) तिथि मंगलवार को पड़े तो उसे ‘अंगारकी चतुर्थी’ कहते हैं। यह अत्यंत शुभ संयोग माना जाता है — मंगल दोष निवारण और समस्त विघ्नों की समाप्ति एक साथ। अंगारकी चतुर्थी की तिथि हर वर्ष पंचांग से ज्ञात करें।

नोट: उपरोक्त सभी तिथियाँ हर वर्ष बदलती हैं। चालू वर्ष की सटीक तिथियों और शुभ मुहूर्त की जानकारी के लिए पंडित अनिल शर्मा जी से 9826365960 पर संपर्क करें।

मंगल दोष पूजा के सबसे शुभ अवसर कौन-से हैं?

  • भौमवती अमावस्या — मंगलवार + अमावस्या का दुर्लभ संयोग। मंगल दोष निवारण के लिए सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।
  • नवरात्रि का मंगलवार — देवी शक्ति + मंगल शांति का विशेष संयोग।
  • सावन के मंगलवार — श्रावण में मंगलनाथ उज्जैन में शिव + मंगल की एक साथ कृपा मानी जाती है।
  • अंगारकी चतुर्थी — मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी।
  • हर मंगलवार — वर्षभर के मंगलवारों में से किसी भी दिन पूजा संभव है।

उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर का क्या महत्व है?

मंगल दोष पूजा के लिए उज्जैन मंगलनाथ मंदिर प्रमुख स्थानों में से एक है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  • मंगल ग्रह की जन्मभूमि — पुराणों के अनुसार मंगल ग्रह की उत्पत्ति उज्जैन की भूमि से हुई मानी जाती है। जन्मभूमि पर की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
  • अंगारेश्वर महादेव — उज्जैन का प्राचीन अंगारेश्वर महादेव मंदिर मंगल दोष निवारण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ शिव और मंगल दोनों की कृपा एक साथ मिलती है, ऐसी मान्यता है।
  • पारद शिवलिंग रुद्राभिषेक — पंडित अनिल शर्मा जी यहाँ पारद शिवलिंग पर रुद्राभिषेक कराते हैं, जिसे मंगल दोष पूजा के साथ विशेष महत्व दिया जाता है।
  • अनुभवी पंडित — पंडित अनिल शर्मा जी उज्जैन के अनुभवी पंडितों में हैं। उनकी पूजन पद्धति पूर्णतः वैदिक और शास्त्रसम्मत है।

मंगल दोष पूजा की सम्पूर्ण विधि — उज्जैन

पंडित अनिल शर्मा जी के साथ मंगल दोष पूजा की विधि:

  • गणेश पूजन: सर्वप्रथम भगवान गणेश का पूजन — सभी विघ्नों की निवृत्ति के लिए।
  • संकल्प: यजमान का नाम, गोत्र और मंगल दोष का प्रकार बताकर संकल्प।
  • मंगल देव पूजन: लाल पुष्प, लाल वस्त्र, रक्त चंदन, मसूर दाल, गुड़ से मंगल का पूजन।
  • नवग्रह पूजन: सभी 9 ग्रहों की शांति के लिए नवग्रह पूजन।
  • रुद्राभिषेक: भगवान शिव का पंचामृत + जल से अभिषेक।
  • हवन: मंगल के विशेष मंत्रों के साथ — लाल चंदन, गुग्गल, तिल की आहुति।
  • मंत्र जाप: “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” का नियमित जाप।
  • आरती और प्रसाद: पूजन की समाप्ति के बाद विशेष आरती।

उज्जैन में मंगल दोष पूजा में कितना खर्च आता है?

पूजा का खर्च पूजा के प्रकार, अनुष्ठान की अवधि और सामग्री पर निर्भर करता है। सटीक और वर्तमान खर्च की जानकारी के लिए उज्जैन के अनुभवी पंडित अनिल शर्मा जी से नीचे दिये गए नंबर पर संपर्क करें।

मंगल दोष पूजा से होने वाले लाभ कौन-कौन से है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगल दोष पूजा से निम्नलिखित लाभ माने जाते हैं:

  • पहला भाव — आत्मविश्वास में वृद्धि और स्वास्थ्य में सुधार की मान्यता।
  • चौथा भाव — घर में शांति और भूमि विवादों के समाधान की मान्यता।
  • सातवाँ भाव — विवाह में आ रही बाधाओं के दूर होने और दाम्पत्य संबंधों में मधुरता की मान्यता।
  • आठवाँ भाव — सुरक्षा की भावना और अचानक संकटों से राहत की मान्यता।
  • बारहवाँ भाव — दाम्पत्य सुख और अनावश्यक व्यय में कमी की मान्यता।

पूजा के बाद क्या करें — जरूरी नियम

⦁ पूजा के बाद कुछ दिनों तक लाल वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
⦁ प्रत्येक मंगलवार हनुमान जी की पूजा करें — वे मंगल के अधिपति देव माने जाते हैं।
⦁ “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” — प्रतिदिन नियमित जाप करें।
⦁ मंगलवार को मसूर दाल, लाल कपड़ा या गुड़ का दान करें।
⦁ माँसाहार और मदिरा से कुछ समय तक परहेज करना शुभ माना जाता है।
⦁ यदि विवाह बाधा के लिए पूजा है — नियमित मंगलवार व्रत रखना शुभ माना जाता है।

मंगल दोष पूजा का सबसे शुभ दिन कौन सा है?

भौमवती अमावस्या — जिस दिन मंगलवार और अमावस्या का दुर्लभ संयोग हो। यह मंगल दोष पूजा के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। इसकी तिथि हर वर्ष बदलती है, इसलिए चालू वर्ष की तिथि पंचांग से ज्ञात करें या पंडित अनिल शर्मा जी से 9826365960 पर संपर्क करें।

मंगलनाथ मंदिर में की गई पूजा क्यों श्रेष्ठ है?

उज्जैन मंगल ग्रह की जन्मभूमि मानी जाती है। जन्मभूमि पर की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ पूजा करने से मंगल दोष के प्रभाव को शांत करने में सहायता मिलती है।

शादी के बाद भी मंगल दोष पूजा हो सकती है?

हाँ। विवाह के बाद दाम्पत्य जीवन में शांति, जीवनसाथी के स्वास्थ्य और परस्पर प्रेम के लिए यह पूजा लाभदायक मानी जाती है।

क्या घर बैठे / ऑनलाइन पूजा हो सकती है?

पूजा व्यवस्था और संकल्प की सुविधा के बारे में जानकारी के लिए पंडित अनिल शर्मा जी से 9826365960 पर संपर्क करें।

मंगल दोष पूजा बुकिंग — पंडित अनिल शर्मा जी

यदि आप भी उज्जैन में मंगल दोष पूजा पूरी विधि के साथ कराना चाहते हैं तो देर न करें — आज ही नीचे दिये गए नंबर पर कॉल/मैसेज करें और पंडित जी से पूजा की पूरी जानकारी प्राप्त करें।

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