आंशिक मंगल दोष

आंशिक मंगल दोष: उज्जैन मंगलनाथ मंदिर मे कब और कैसे कराए पूजा

आंशिक मंगल दोष एक ऐसा ग्रहीय योग है जो विवाह में बाधाएँ तो डालता है, लेकिन उन्हें अपरिहार्य नहीं बनाता। इसका प्रभाव हल्का, धीमा और नियंत्रण योग्य होता है। सही समझ, सही उपाय और उज्जैन में विधिवत पूजा से इस दोष को पूरी तरह शांत किया जा सकता है। आंशिक मंगल दोष एक ऐसी अवस्था है जो पूर्ण मंगल दोष से बिल्कुल अलग है।

उज्जैन की पवित्र धरती पर की गई पूजा केवल दोष निवारण तक सीमित नहीं रहती। यहाँ की पूजा मंगल की शुभ ऊर्जा को भी जागृत करती है — वह ऊर्जा जो आपको साहस, शक्ति और सफलता प्रदान करती है। यदि आप भी अपनी पूजा को सफल और लाभकारी बनाना चाहते है तो आज ही उज्जैन में मंगल दोष पूजा पूरी विधि के साथ सम्पन्न कराएँ।

अंशिक मंगल दोष क्या है? इसका अर्थ क्या है?

आंशिक मंगल दोष

“अंश” का अर्थ होता है — एक हिस्सा, एक अंश, एक अपूर्ण रूप। जब कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति ऐसी हो कि उसका प्रभाव पूर्ण न होकर केवल आंशिक हो, तब उसे आंशिक मंगल दोष कहा जाता है। यह दोष तब उत्पन्न होता है जब मंगल ग्रह कुंडली के 1वें, 2वें, 4वें या 12वें भाव में हो, लेकिन किसी शुभ ग्रह की दृष्टि या युति के कारण उसकी अग्नि थोड़ी मंद पड़ जाए।

आंशिक मंगल दोष में यह अग्नि की धीमी लौ की तरह है — जो कमरे को गर्म तो करती है, पर जलाती नहीं। यही कारण है कि इस दोष के प्रभाव धीरे-धीरे आते हैं और अक्सर इतने सूक्ष्म होते हैं कि लोग उन्हें साधारण जीवन की चुनौतियाँ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

आंशिक मंगल दोष और पूर्ण मंगल दोष में क्या अंतर है?

आंशिक और पूर्ण मंगल दोष के बीच का अंतर केवल गंभीरता का नहीं, बल्कि प्रकृति का भी है। पूर्ण मंगल दोष में मंगल ग्रह 7वें या 8वें भाव में होता है — ये सीधे विवाह और आयु के भाव हैं। आंशिक मंगल दोष में मंगल 1वें, 2वें, 4वें या 12वें भाव में होता है — ये भाव व्यक्तित्व, वाणी, सुख और व्यय से जुड़े हैं।

इसका अर्थ यह हुआ कि आंशिक मंगल दोष सीधे विवाह को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उन गुणों को प्रभावित करता है जो विवाह को सफल बनाते हैं। यह आपके व्यक्तित्व में एक ऐसी कठोरता डाल देता है जो रिश्तों में धीरे-धीरे दरारें बनाती है। यह आपकी वाणी में ऐसी तीव्रता ला देता है जो प्यार को कटुता में बदल देती है। यह आपके घरेलू सुख में ऐसी अस्थिरता पैदा करता है कि पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति ठंडे हो जाते हैं।

आंशिक मंगल दोष की विशेष पहचान क्या है?

आंशिक मंगल दोष की पहचान के लिए केवल व्यक्ति की जन्म कुंडली देखना ही पर्याप्त नहीं होता। एक अनुभवी ज्योतिषी को निम्नलिखित बिंदुओं का विश्लेषण करना पड़ता है:

  • चंद्र कुंडली का अध्ययन — चंद्रमा से मंगल की स्थिति देखनी चाहिए। यदि चंद्र कुंडली में मंगल मंगलिक भावों में है, तो यह चंद्र मंगलिक या अंशिक मंगल दोष का संकेत देता है।
  • नवमांश कुंडली (D-9) — यह विवाह की कुंडली होती है। यदि नवमांश में मंगल की स्थिति शुभ है, तो अंशिक मंगल दोष का प्रभाव और कम हो जाता है।
  • मंगल की दशा और अंतर्दशा — यदि मंगल की महादशा या अंतर्दशा नहीं चल रही है, तो अंशिक मंगल दोष सुप्त रहता है। लेकिन जैसे ही मंगल की दशा आती है, यह दोष सक्रिय हो जाता है।
  • शुभ ग्रहों की दृष्टि — यदि गुरु, शुक्र या बुध की दृष्टि मंगल पर पड़ रही है, तो अंशिक मंगल दोष का प्रभाव कमजोर हो जाता है।

आंशिक मंगल दोष का विवाह पर क्या प्रभाव पड़ता है?

विवाह में देरी

आंशिक मंगल दोष का सबसे सामान्य प्रभाव विवाह में देरी है। लेकिन यह देरी पूर्ण मंगल दोष की तरह तीव्र नहीं होती। पूर्ण मंगल दोष में रिश्ते आते ही टूट जाते हैं, लेकिन अंशिक मंगल दोष में रिश्ते बनते हैं, बातचीत चलती है, परिवार मिलते हैं, और फिर कहीं न कहीं रुकावट आ जाती है।

इस देरी का कारण मंगल की आंशिक अग्नि होती है जो आपके व्यक्तित्व में एक ऐसी ऊर्जा डाल देती है जो दूसरों को अचानक थकान देती है।

रिश्तों में गलतफहमी

आंशिक मंगल दोष में मंगल अक्सर 2वें भाव (वाणी का भाव) या 1वें भाव (व्यक्तित्व) में होता है। जब मंगल वाणी के भाव में होता है, तो व्यक्ति की बोलने की शैली में एक स्वाभाविक तीव्रता आ जाती है। वह जानबूझकर किसी को दुखी नहीं करता, लेकिन उसके शब्द चोट पहुँचा देते हैं।

विवाह पूर्व की बातचीत में यह विशेष रूप से हानिकारक होता है। लड़का-लड़की एक-दूसरे को पसंद करते हैं, लेकिन कुछ बातचीत के बाद अचानक दूरी बन जाती है। लड़की को लगता है कि लड़का बहुत आक्रामक है। लड़के को लगता है कि लड़की बहुत संवेदनशील है। असल में दोनों अंशिक मंगल दोष के प्रभाव में हैं।

घरेलू सुख में अस्थिरता

जब आंशिक मंगल दोष में मंगल 4वें भाव (सुख का भाव) में होता है, तो यह घरेलू जीवन को प्रभावित करता है। विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच एक अजीब सी ठंडक आ जाती है। वे एक-दूसरे से बात करते हैं, लेकिन कोई गहरा संवाद नहीं होता। घर में सामान्य दिखने वाली चीजें भी तनाव का कारण बन जाती हैं — खाने का स्वाद, कमरे की सजावट, टीवी का कार्यक्रम।

यह इसलिए होता है क्योंकि 4वें भाव का मंगल घरेलू वातावरण में एक अदृश्य आक्रामकता डाल देता है। पति-पत्नी एक-दूसरे से लड़ते नहीं, लेकिन एक-दूसरे के प्रति उदासीन हो जाते हैं। यह उदासीनता धीरे-धीरे रिश्ते को खोखला कर देती है।

आत्मविश्वास का अधिकता

1वें भाव में मंगल होने पर आंशिक मंगल दोष व्यक्ति को अत्यधिक आत्मविश्वासी बना देता है। वह किसी की सहायता लेना पसंद नहीं करता। विवाह में यह एक बड़ी बाधा बन जाता है क्योंकि विवाह तो दो लोगों के बीच सहयोग और निर्भरता का बंधन है। जब एक पार्टनर हमेशा स्वतंत्र रहना चाहता है, तो दूसरा पार्टनर अपने आप को अनावश्यक महसूस करने लगता है।

12वें भाव में आंशिक

12वें भाव में मंगल होने पर आंशिक मंगल दोष व्यक्ति को अपने रिश्तों में नुकसान का भय दिलाता है। वह अपने भावनात्मक निवेश से डरता है। विवाह के बाद भी वह पूरी तरह से खुल नहीं पाता। उसे लगता है कि अगर वह पूरी तरह से समर्पित हो गया, तो उसे धोखा मिलेगा। यह भय रिश्ते में एक अदृश्य दीवार बना देता है जिसे कोई तोड़ नहीं पाता।

आंशिक मंगल दोष की उम्र के साथ स्वतः शांति: समय की चिकित्सा

18 वर्ष की उम्र: प्राकृतिक शांति का प्रारंभ

आंशिक मंगल दोष की एक अनोखी विशेषता यह है कि यह उम्र के साथ स्वतः कमजोर पड़ने लगता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दोष लगभग 18 वर्ष की उम्र के बाद अपना प्रभाव खोने लगता है।

इसका मुख्य कारण यह है कि 18 वर्ष की उम्र तक मंगल की ऊर्जा अत्यधिक सक्रिय रहती है — युवावस्था में आक्रामकता, आत्मविश्वास और ऊर्जा का स्तर स्वाभाविक रूप से ऊँचा होता है। जैसे ही व्यक्ति परिपक्व होता है, यह ऊर्जा स्थिर हो जाती है और मंगल का प्रभाव संतुलित हो जाता है।

28 वर्ष: पूर्ण शांति की सीमा

कुछ ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार, आंशिक मंगल दोष 28 वर्ष की उम्र तक पूरी तरह से शांत हो जाता है।

इसका कारण यह है कि 28 वर्ष की उम्र तक व्यक्ति का मंगल ग्रह अपनी पूरी परिपक्वता प्राप्त कर लेता है। इस उम्र के बाद विवाह करने पर आंशिक मंगल दोष का कोई विशेष प्रभाव नहीं रहता।

उज्जैन में आंशिक मंगल दोष का निवारण कैसे किया जाता है?

उज्जैन: मंगल दोष निवारण का सर्वोत्तम स्थान

उज्जैन भारत के सात पवित्र नगरों (सप्तपुरी) में से एक है। यहाँ भगवान महाकालेश्वर का प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग स्थापित है, जो समय के स्वामी माने जाते हैं। लेकिन उज्जैन की महत्ता केवल महाकाल तक सीमित नहीं है — यहाँ मंगलनाथ मंदिर भी स्थित है, जो मंगल ग्रह की उत्पत्ति स्थली मानी जाती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, उज्जैन में कर्क रेखा (ट्रॉपिक ऑफ कैंसर) के ठीक ऊपर मंगलनाथ मंदिर स्थित है। यह वह स्थान है जहाँ मंगल ग्रह की कॉस्मिक ऊर्जा सबसे अधिक केंद्रित होती है। इसीलिए उज्जैन में मंगल दोष निवारण पूजा का फल अन्य स्थानों की अपेक्षा कई गुना अधिक माना जाता है।

मंगलनाथ मंदिर: मंगल ग्रह की जन्मभूमि

मंगलनाथ मंदिर उज्जैन का एक अनोखा और अत्यंत शक्तिशाली मंदिर है। यहाँ भगवान मंगल की विशेष पूजा होती है। मंदिर की विशेषता यह है कि यह कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण मंगल ग्रह की सीधी ऊर्जा प्राप्त करता है।

मंगलनाथ मंदिर में आंशिक मंगल दोष निवारण पूजा कराने से मंगल ग्रह की आक्रामक ऊर्जा शांत होती है और उसकी रक्षा और साहस प्रदान करने वाली शक्ति सक्रिय होती है। यहाँ की पूजा केवल दोष निवारण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मंगल की शुभ ऊर्जा को भी जागृत करती है।

अंगारेश्वर मंदिर: शिप्रा नदी के बीच में स्थित दिव्य मंदिर

उज्जैन में श्री अंगारेश्वर मंदिर शिप्रा नदी के बीच में स्थित है। यह मंदिर मंगल दोष निवारण के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। मान्यता है कि भगवान अंगारेश्वर का शरीर अंगारों से बना है, जिससे उन्हें अत्यंत कष्ट होता है। भक्त उन्हें भात पूजा (दही-चावल का भोग) अर्पित करके उनकी पीड़ा शांत करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

शिप्रा नदी को मोक्षदायिनी कहा जाता है। इस नदी में स्नान करके मंदिर में पूजा करने से आंशिक मंगल दोष का प्रभाव कम होने लगता है। नदी का जल मंगल की अग्नि को शीतल करता है और भक्त को मानसिक शांति प्रदान करता है।

उज्जैन में आंशिक मंगल दोष निवारण पूजा की विधि क्या है?

पूजा का शुभ समय

आंशिक मंगल दोष निवारण पूजा के लिए मंगलवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। मंगलवार को मंगल ग्रह का वार होता है, इसलिए इस दिन पूजा का फल अधिक मिलता है। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित समय भी शुभ माने जाते हैं:

  • मंगलवार का मंगल काल — मंगलवार को सुबह के समय मंगल काल में पूजा अत्यंत फलदायी होती है। इस समय मंगल की ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय होती है और पूजा का प्रभाव सीधे मंगल तक पहुँचता है।
  • हनुमान जयंती — भगवान हनुमान मंगल के अधिपति माने जाते हैं। हनुमान जयंती पर की गई पूजा आंशिक मंगल दोष को स्थायी रूप से शांत करने में सहायक होती है।
  • मंगल अमावस्या — मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या अंशिक मंगल दोष निवारण के लिए अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है। इस दिन पितृ ऊर्जा और मंगल ऊर्जा दोनों का संयोग होता है, जो दोष को जड़ से समाप्त करता है।
  • अक्षय तृतीया और अन्य शुभ तिथियाँ — इन तिथियों पर की गई पूजा का फल कभी नष्ट नहीं होता।

पूजा सामग्री

आंशिक मंगल दोष निवारण पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

लाल वस्त्र, लाल फूल — गेंदा या गुलाब, सिंदूर, चंदन, अक्षत, लाल चंदन, मंगल यंत्र, हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर, नारियल, सुपारी, पंचामृत, शुद्ध घी, कपूर, धूप, दीपक, लड्डू या बूंदी, गुड़, लाल मसूर की दाल, लाल कंबल, ताम्र पात्र, गंगाजल, कलश, मंगलवारी व्रत का सामान, और दान के लिए धन।

विस्तृत पूजा विधि— चरणबद्ध प्रक्रिया

  • संकल्प और आत्मशुद्धि: पंडित जी के मार्गदर्शन में पूजा की शुरुआत संकल्प से होती है। कलश में गंगाजल, अक्षत, सुपारी और दूर्वा घास डालकर स्थापित किया जाता है।
  • नवग्रह पूजन: नवग्रहों की पूजा की जाती है। सभी नौ ग्रहों को उनके मंत्रों से याद करके अक्षत, फूल और चंदन अर्पित किए जाते हैं। विशेष रूप से मंगल ग्रह की पूजा पर ध्यान दिया जाता है।
  • मंगल यंत्र स्थापना और पूजन: मंगल यंत्र की विधिवत स्थापना की जाती है। यंत्र को पंचामृत से स्नान कराकर शुद्ध किया जाता है। यंत्र पर सिंदूर, लाल चंदन और अक्षत से तिलक लगाया जाता है। “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का जप किया जाता है।
  • हनुमान जी की विशेष पूजा: भगवान हनुमान मंगल ग्रह के अधिपति माने जाते हैं। इसलिए मंगल दोष निवारण में हनुमान जी की पूजा अत्यंत आवश्यक है। हनुमान जी को लाल वस्त्र, लाल फूल, सिंदूर और गुड़ अर्पित किए जाते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जप किया जाता है।
  • मंगल ग्रह का अभिषेक: मंगल ग्रह के मंत्रों का उच्चारण करते हुए मंगल यंत्र या मंगल प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है। अभिषेक के लिए गंगाजल, दही, शहद, दूध और शुद्ध जल का उपयोग किया जाता है।
  • भात पूजा (अंगारेश्वर मंदिर में): यदि पूजा अंगारेश्वर मंदिर में हो रही है, तो भात पूजा का विशेष महत्व है। दही-चावल का भोग भगवान अंगारेश्वर को अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि अंगारेश्वर का शरीर अंगारों से बना है, जिससे उन्हें अत्यंत कष्ट होता है। दही-चावल का शीतल भोग उनकी पीड़ा शांत करता है।
  • मंगल दोष निवारण हवन: हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करके हवन सामग्री, घी, लाल मसूर की दाल, लाल चंदन और नवग्रह सामग्री की आहुतियाँ दी जाती हैं। हवन में मंगल दोष निवारण मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।
  • पूर्णाहुति और आशीर्वाद: हवन के अंत में पूर्णाहुति दी जाती है। पंडित जी द्वारा आशीर्वाद दिया जाता है और पूजा सम्पन्न होती है। पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है। प्रसाद में लड्डू या बूंदी शामिल होती है।
  • दान और पुण्य: पूजा के अंत में दान और पुण्य का विशेष महत्व है। मंगलवार को लाल वस्त्र, लाल कंबल, गुड़, लाल मसूर की दाल और ताम्र पात्र का दान किया जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना चाहिए।

अंशिक मंगल दोष निवारण पूजा के शक्तिशाली मंत्र कौन-से है?

मंगल बीज मंत्र

“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”

यह मंगल ग्रह का प्रधान बीज मंत्र है। इस मंत्र का नियमित जप मंगल की आक्रामक ऊर्जा को शांत करता है और उसकी रक्षात्मक शक्ति को जागृत करता है।

मंगल गायत्री मंत्र

“ॐ क्षिति पुत्राय विद्महे लोहितांगाय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्”

यह मंत्र मंगल ग्रह की गायत्री है। इसके जप से मंगल की शुभ ऊर्जा बढ़ती है और उसके अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

मंगल नाम मंत्र

“ॐ अं अंगारकाय नमः” या “ॐ भौं भौमाय नमः”

ये सरल नाम मंत्र हैं जिनका प्रतिदिन जप किया जा सकता है।

मंगल स्तोत्र

“अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः। कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः ॥”

इस स्तोत्र के पाठ से मंगल ग्रह प्रसन्न होता है और धन, साहस और शक्ति की प्राप्ति होती है।

हनुमान मंत्र

“ॐ हं हनुमते नमः”

भगवान हनुमान मंगल के अधिपति हैं। इस मंत्र का जप मंगल दोष के प्रभाव को तुरंत कम करता है।

अंशिक मंगल दोष निवारण पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

  • विवाह में बाधाओं का निवारण: अंशिक मंगल दोष निवारण पूजा का प्रमुख लाभ विवाह में आ रही रुकावटों का समाप्त होना है। रिश्ते सफलतापूर्वक आगे बढ़ते हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
  • वैवाहिक जीवन में सामंजस्य: पूजा के बाद पति-पत्नी के बीच समझ और सामंजस्य बढ़ता है। छोटी-छोटी बातों पर होने वाले विवाद कम हो जाते हैं और रिश्ते में मधुरता आती है।
  • आत्मविश्वास और साहस की वृद्धि: मंगल ग्रह साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम का प्रतीक है। पूजा के बाद मंगल की शुभ ऊर्जा जागृत होती है, जिससे व्यक्ति में आत्मविश्वास और साहस की वृद्धि होती है।
  • स्वास्थ्य लाभ: अंशिक मंगल दोष से रक्तचाप, त्वचा रोग, सर्जरी और दुर्घटना का भय रहता है। पूजा के बाद ये स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ कम होती हैं और शारीरिक शक्ति बढ़ती है।
  • आर्थिक स्थिरता: मंगल ग्रह भूमि, संपत्ति और धन का भी कारक है। पूजा के बाद आर्थिक समस्याएँ दूर होती हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
  • मानसिक शांति: अंशिक मंगल दोष के कारण व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और अशांति रहती है। पूजा के बाद मन में शांति और स्थिरता आती है। व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है।

पूजा के नियम और सावधानियाँ क्या है?

पूजा से पहले के नियम

  • पूजा से कम से कम एक सप्ताह पहले से मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग करें। पूजा से तीन दिन पहले से ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • पूजा वाले दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के दिन उपवास रखना चाहिए। पूजा से पहले अपनी कुंडली एक अनुभवी ज्योतिषी को अवश्य दिखाएँ।

पूजा के दौरान की सावधानियाँ

पूजा के दौरान मन को एकाग्र रखें और नकारात्मक विचारों से बचें। पंडित जी के निर्देशों का पालन करें। पूजा में उपयोग की जाने वाली सामग्री शुद्ध होनी चाहिए। पूजा के समय मोबाइल फोन और अन्य विघ्नों से दूर रहें। पूजा के दौरान शांति और धैर्य बनाए रखें। मंत्रों का स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण करें।

उज्जैन में आंशिक मंगल दोष पूजा की लागत कितनी है?

पूजा की अवधि

उज्जैन में अंशिक मंगल दोष निवारण पूजा लगभग 2 से 3 घंटे में सम्पन्न होती है। यदि पूजा में हवन, अभिषेक और भात पूजा सभी शामिल हों, तो यह समय 3 से 4 घंटे तक हो सकता है।

पूजा की लागत

उज्जैन में अंशिक मंगल दोष निवारण पूजा की लागत लगभग 2500 रुपये से शुरू होकर 5000 रुपये तक हो सकती है। लागत पंडित जी के अनुभव, पूजा की विधि, सामग्री की गुणवत्ता और अतिरिक्त सेवाओं के अनुसार भिन्न होती है।

सामान्य पूजा पैकेज में पूजा सामग्री, पंडित जी की दक्षिणा और हवन सामग्री शामिल होती है। कुछ पंडित जी ऑनलाइन पूजा की सुविधा भी प्रदान करते हैं। पूजा खर्च के बारें में अधिक और सटीक जानकारी के लिए आज ही उज्जैन के अनुभवी पंडित हरिओम शर्मा जी से संपर्क करें।

आंशिक मंगल दोष पूजा के उपाय: मंगल को कैसे संतुलित रखें?

  • मंगलवार का व्रत: प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखना अंशिक मंगल दोष के लिए सबसे प्रभावी नियमित उपाय है। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें, हनुमान चालीसा का पाठ करें और मंगल मंत्रों का जप करें।
  • हनुमान जी की पूजा: भगवान हनुमान मंगल के अधिपति हैं। नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगल की शेष ऊर्जा भी शांत रहती है। मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
  • लाल मूंगा रत्न धारण करना: एक अनुभवी ज्योतिषी की सलाह से लाल मूंगा (रेड कोरल) रत्न धारण किया जा सकता है। यह रत्न मंगल की शुभ ऊर्जा को बढ़ाता है और उसके अशुभ प्रभावों को कम करता है।
  • मंगलवार को दान: प्रत्येक मंगलवार को लाल वस्त्र, गुड़, लाल मसूर की दाल, लाल कंबल और ताम्र पात्र का दान करना चाहिए। दान से मंगल की ऊर्जा संतुलित रहती है।
  • मंगल मंत्र जप: “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का प्रतिदिन कम से कम 108 बार जप करना चाहिए। मंगलवार को इस मंत्र का जप 1008 बार करने से विशेष लाभ मिलता है।

उज्जैन में आंशिक मंगल दोष पूजा की बुकिंग कैसे करें?

अंशिक मंगल दोष कोई शाप नहीं है। यह आपकी कुंडली में मंगल ग्रह की एक विशेष स्थिति है जो आपके व्यक्तित्व में कुछ विशेष गुण डालती है। अपने जीवन में आंशिक मंगल दोष के कारण आ रही समस्याओं का समाधान पाने के लिए अभी नीचे दिये गए नंबर पर कॉल करें।

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