भात पूजा और मंगल दोष निवारण पूजा

भात पूजा और मंगल दोष निवारण पूजा: मंगलनाथ मंदिर उज्जैन

अधिकांश लोग यह जानते हैं कि उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा होती है, लेकिन बहुत कम लोग यह समझते हैं कि इस पूजा में चावल (भात) का ही उपयोग क्यों किया जाता है। क्या यह केवल परंपरा है? क्या इसका संबंध केवल मांगलिक दोष से है? या इसके पीछे कोई गहरा ज्योतिषीय और आध्यात्मिक रहस्य छिपा है?

वास्तव में भात पूजा केवल विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने का उपाय नहीं है, बल्कि यह मंगल ग्रह की उग्र ऊर्जा को संतुलित करने वाली एक विशेष वैदिक प्रक्रिया मानी जाती है।

mangal dosh nivaran puja

मांगलिक व्यक्तियों को विवाह से पूर्व उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा कराने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे मंगल दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति आती है। श्रद्धा और सही विधि से किया गया यह अनुष्ठान मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन की भावना से किया जाता है।

मंगल दोष के नकारात्मक प्रभाव को शांत करने के लिए उज्जैन में मंगल दोष पूजा सही विधि, योग्य आचार्य के मार्गदर्शन और श्रद्धा के साथ किया गया अनुष्ठान है।

भात पूजा क्या है?

Mangal Bhaat Puja

भात अर्थात चावल। चावल से शिवलिंग रूपी मंगलदेव की पूजा की जाती है। जो मांगलिक हैं उन्हें विवाह से पूर्व भात पूजा अवश्य करानी चाहिए। मान्यता है कि यह पूजा मंगल ग्रह की उग्रता को शांत करती है और मंगल दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करती है।

मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह के जन्मस्थल के रूप में एक अद्वितीय और पावन स्थान माना जाता है। यहाँ की भात पूजा मंगल दोष निवारण के लिए विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है।

मंगल ग्रह की उत्पत्ति की पौराणिक कथा क्या है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय अंधकासुर नामक दैत्य ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके उन्हें प्रसन्न कर लिया था। इस वरदान के बाद अंधकासुर ने उज्जैन नगरी में तबाही मचा दी। बाद में शिवजी ने अंधकासुर से युद्ध किया और उसका संहार किया। युद्ध के दौरान शिवजी के पसीने की बूंद की गर्मी से उज्जैन की धरती फटकर दो भागों में विभक्त हो गई और मंगल ग्रह का जन्म हुआ, ऐसी कथा प्रचलित है।

कथा के अनुसार जब मंगल उग्र अंगारक स्वभाव के हो गए, तब सभी देवताओं और ऋषि-मुनियों ने मंगल की उग्रता की शांति के लिए दही और भात का लेपन किया। दही और भात दोनों ही पदार्थ शीतल माने जाते हैं, जिससे मंगलदेव की उग्रता शांत हुई। इसी मान्यता के कारण जिन व्यक्तियों की कुंडली में मंगल ग्रह अतिउग्र होता है, उनको मंगल भात पूजा की सलाह दी जाती है।

मंगल दोष क्या होता है और यह दोष क्यों होता है?

जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल ग्रह लग्न से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो, उसे मांगलिक कहा जाता है। मांगलिक दोष को कुज दोष या अंगारक दोष भी कहा जाता है। यह ज्योतिषीय स्थिति पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से प्रभावित करती है और विवाह सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं में चुनौतियाँ ला सकती है।

मांगलिक दोष अक्सर संबंधों में कठिनाइयों, विवादों और विवाह में देरी से जुड़ा होता है। मान्यता है कि गंभीर मामलों में यह अलगाव या तलाक जैसी स्थितियों का कारण बन सकता है, विशेष रूप से यदि मांगलिक व्यक्ति गैर-मांगलिक व्यक्ति से विवाह करता है।

मंगल ग्रह साहस, दृढ़ संकल्प और ऊर्जा का प्रतीक है, परंतु जब यह अनुकूल स्थिति में न हो, तो इसकी उग्रता व्यक्ति के जीवन में अस्थिरता और संघर्ष ला सकती है।

मांगलिक कुंडली के प्रकार

जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में कहीं पर भी मंगल स्थित हो और उसके साथ शनि, सूर्य या राहु जैसे पाप ग्रह बैठे हों, तो लोक मान्यता में इसे द्विगुणी मांगलिक दोष कहा जाता है और इस स्थिति में भात पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

भात पूजा कैसे की जाती है? इस पूजा की विधि क्या है?

  • भात पूजा में सर्वप्रथम गणेशजी और माता पार्वतीजी का पूजन होता है। इसके बाद नवग्रह पूजन, फिर कलश पूजन एवं शिवलिंग रूपी भगवान का पंचामृत पूजन एवं अभिषेक वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा किया जाता है।
  • इसके बाद भगवान को भात अर्पित करके उनका पूजन किया जाता है। विधिवत रूप से भात पूजन, अभिषेक और मंगल जाप के बाद आरती उतारी जाती है।
  • परंपरागत विधि के अनुसार चावल को पीसकर उसका लेप बनाया जाता है और इस लेप से शिवलिंग का निर्माण किया जाता है।
  • इस शिवलिंग पर दही, दूध, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जाता है।
  • फिर वैदिक मंत्रों के साथ मंगल ग्रह का जाप किया जाता है।
  • अंत में भात का भोग लगाकर आरती की जाती है।

भात पूजा कहाँ करें?

भात पूजन मंगल दोष निवारण हेतु किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मंगलदेव का जन्म मध्य प्रदेश के अवंतिका अर्थात उज्जैन में हुआ था। जहाँ उनका जन्म हुआ, उस स्थान को मंगलनाथ कहा जाता है। इस स्थान पर मंगल ग्रह का एक प्रमुख प्राचीन मंदिर स्थित है।

कहा जाता है कि इसी स्थान से कर्क रेखा गुजरती है और यहाँ स्थापित स्वयंभू शिवलिंग पर मंगल ग्रह की किरणें पड़ती हैं। इसलिए उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

मंगलनाथ मंदिर: मंगल ग्रह का पावन जन्मस्थल

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में शिप्रा नदी के तट पर स्थित मंगलनाथ मंदिर एक ऐसा दिव्य स्थान है जहाँ मंगल ग्रह की उत्पत्ति की पौराणिक कथा जुड़ी है। मत्स्य पुराण के अनुसार यह मंगल ग्रह का जन्मस्थल माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और उज्जैन के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।

मंगलनाथ मंदिर में अन्य पूजाएँ और उपाय कौन-कौन से हैं?

मंगल दोष निवारण पूजा उज्जैन

मंगल दोष निवारण पूजा एक विशेष अनुष्ठान है जो कुंडली में मंगल ग्रह के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है।

कालसर्प दोष पूजा

मंगलनाथ मंदिर में कालसर्प दोष निवारण पूजा भी की जाती है। यह पूजा कुंडली में राहु-केतु के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए की जाती है।

नवग्रह शांति पूजा

नवग्रह शांति पूजा सभी नौ ग्रहों के शुभ प्रभावों को बढ़ाने और अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए की जाती है।

मंगल यंत्र पूजन

मंगल यंत्र पूजन विशेष परिस्थितियों में किया जाने वाला एक उपाय माना जाता है।

मांगलिक कुंडली का मिलान और विवाह संबंधी नियम

वर और कन्या दोनों की कुंडली मांगलिक हो तो विवाह शुभ माना जाता है। एक मांगलिक और एक गैर-मांगलिक कुंडली का मिलान होने पर विवाह से पूर्व उचित निवारण उपाय कराने की सलाह दी जाती है।

मांगलिक व्यक्तियों को विवाह से पूर्व भात पूजा के अलावा पीपल विवाह, कुंभ विवाह, सालिग्राम विवाह आदि उपाय भी बताए जाते हैं। मान्यता है कि इन उपायों से दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति आती है।

मंगलनाथ मंदिर के आसपास के अन्य प्रसिद्ध मंदिर

उज्जैन को महाकाल की नगरी भी कहा जाता है। मंगलनाथ मंदिर के अलावा यहाँ कई अन्य प्रसिद्ध मंदिर हैं। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। चिंतामन गणेश मंदिर, काल भैरव मंदिर और हरसिद्धि मंदिर भी उज्जैन के प्रमुख मंदिर हैं। इन सभी मंदिरों के दर्शन मंगलनाथ मंदिर यात्रा को और भी पुण्यदायी बनाते हैं।

मंगलनाथ मंदिर में पूजा के लिए सही समय कौन-सा है?

मंगलनाथ मंदिर में पूजा के लिए प्रातःकाल का समय अच्छा माना जाता है। मंगलवार के दिन यहाँ पूजा का विशेष महत्व होता है क्योंकि मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है। पूजा के लिए मंदिर के अधिकृत पंडितों से पहले से संपर्क करके तिथि और समय तय कर लें।

मंगल दोष निवारण के अन्य उपाय कौन-कौन से हैं?

मंगलव्रत

मंगलवार के दिन मंगलव्रत रखने से मंगल दोष के प्रभाव कम होते हैं, ऐसा माना जाता है। इस दिन हनुमानजी की पूजा करें और सिंदूर चढ़ाएं।

मंगल मंत्र जाप

मंगल ग्रह के बीज मंत्र का नियमित जाप करने से मंगल दोष शांत होता है, ऐसी मान्यता है। मंत्र है: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।

हनुमानजी की पूजा

मंगल दोष निवारण के लिए हनुमानजी की पूजा लाभदायक मानी जाती है। मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।

दान-पुण्य

मंगलवार के दिन लाल वस्त्र, गेहूं, मसूर की दाल, ताम्र पात्र और गुड़ का दान शुभ माना जाता है।

पीपल विवाह

जिन जातकों की कुंडली में गंभीर मंगल दोष हो, उन्हें पीपल के वृक्ष से विवाह करने की सलाह दी जाती है। यह विवाह मंगल दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है। अर्क विवाह पूजा विधि — संकल्प से लेकर विवाह संस्कार तक — की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

कुंभ विवाह

कुंभ विवाह भी मंगल दोष निवारण का एक उपाय माना जाता है। इसमें मांगलिक जातक का विवाह एक कलश से किया जाता है जो भगवान विष्णु का प्रतीक होता है। कुम्भ विवाह पूजा उज्जैन में कैसे होती है, इसकी विधि और बुकिंग जानकारी यहाँ देखें।

सालिग्राम विवाह

सालिग्राम विवाह में मांगलिक जातक का विवाह भगवान विष्णु के सालिग्राम रूप से किया जाता है। यह उपाय भी मंगल दोष को शांत करने में सहायक माना गया है।

मंगलनाथ मंदिर में पूजा की बुकिंग कैसे करें?

मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा या मंगल दोष निवारण पूजा कराने के लिए उज्जैन के पंडित अनिल शर्मा से संपर्क करें। पूजा की तिथि, विधि और सामग्री की जानकारी हेतु अभी कॉल करें।

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