भात पूजा का मंगल ग्रह से क्या संबंध है_

भात पूजा का मंगल ग्रह से क्या संबंध है? जाने ज्योतिषीय महत्व

भात पूजा और मंगल ग्रह का संबंध अत्यंत गहरा है। यह पूजा मंगल दोष, विवाह बाधा और पारिवारिक असंतुलन को दूर करने का एक प्रभावी वैदिक उपाय है। यदि इसे सही विधि, सही समय और श्रद्धा के साथ किया जाए, तो विवाह योग मजबूत होते हैं, दांपत्य जीवन सुखी बनता है, मंगल ग्रह की अशुभता शांत होती है।

यदि कुंडली में अन्य दोष भी हों (जैसे कालसर्प, पितृ दोष), तो मंगल पूजा के साथ अन्य शांति उपाय भी आवश्यक हो सकते हैं। लेकिन केवल मंगल दोष के कारण विवाह अटका हो, तो उज्जैन में मंगल दोष भात पूजा अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होती है।

भात पूजा क्या है?

भात पूजा का मतलब है चावल (भात) से पूजा। इसमें चावल से शिवलिंग रूपी मंगल देव की पूजा की जाती है। मंगल ग्रह उग्र और अग्नि तत्व का है। चावल शीतल और जल तत्व का प्रतीक है। चावल चढ़ाने से मंगल की उग्रता शांत होती है।

उज्जैन को मंगल ग्रह की जन्मभूमि माना गया है। यहां भगवान शिव के पसीने से मंगल की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा सबसे फलदायी है। ज्योतिष ग्रंथों में स्पष्ट लिखा है कि मांगलिक व्यक्ति को विवाह से पहले भात पूजा जरूर करानी चाहिए, ताकि दोष के बुरे प्रभाव कम हों और वैवाहिक जीवन सुखमय बने।

भात पूजा एक पारंपरिक वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें मामाजी (मातृ पक्ष) को आमंत्रित कर उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन (भात) कराया जाता है और वस्त्र-दक्षिणा प्रदान की जाती है।

यह पूजा विशेष रूप से—

  • विवाह से पूर्व
  • विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए
  • मंगल दोष, कुल दोष या पारिवारिक असंतुलन को शांत करने हेतु
    की जाती है।

मंगल दोष क्या है? मंगल ग्रह का महत्व समझे?

मंगल ग्रह को ग्रहों का सेनापति कहा जाता है। यह साहस, ऊर्जा और क्रोध का कारक है। जब कुंडली में मंगल लग्न (1st), चौथा, सातवां, आठवां या बारहवां भाव में होता है, तो मंगल दोष बनता है। इसे मांगलिक दोष या कुज दोष भी कहते हैं।

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मंगल दोष के सामान्य प्रभाव क्या है?

  • विवाह में देरी या रुकावट
  • दांपत्य जीवन में झगड़े, कलह
  • पार्टनर की सेहत या आयु पर असर
  • क्रोध, दुर्घटना या आर्थिक नुकसान

ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को पराक्रम, रक्त, ऊर्जा, साहस, विवाह, भाई-बहन, भूमि और संपत्ति का कारक ग्रह माना गया है। जब मंगल अशुभ स्थिति में होता है, तो कुंडली में मंगल दोष (मांगलिक दोष) बनता है।

भात पूजा मंगल दोष को कैसे शांत करती है?

भात पूजा मंगल दोष को शांत करने का एक प्राचीन और अत्यंत प्रभावी ज्योतिषीय उपाय है, क्योंकि मंगल ग्रह अग्नि तत्व का उग्र और क्रोधी स्वभाव वाला होता है, जो कुंडली के लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होने पर वैवाहिक जीवन में कलह, देरी या अन्य बाधाएं पैदा करता है।

इस पूजा में ठंडे और साफ चावल (भात) से शिवलिंग रूपी मंगल देव की पूजा की जाती है, जहां चावल जल तत्व का प्रतीक होने से मंगल की अग्नि जैसी उग्रता को शीतलता प्रदान करता है और उसकी नकारात्मक ऊर्जा को संतुलित कर देता है। विशेष रूप से उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में यह पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है, क्योंकि मत्स्य पुराण के अनुसार मंगल की उत्पत्ति वहीं भगवान शिव के पसीने से हुई थी।

यहां पंचामृत अभिषेक, चावल चढ़ावा और मंत्र जाप (ॐ अं अंगारकाय नमः) से मंगल प्रसन्न होता है, दोष के बुरे प्रभाव कम होते हैं तथा वैवाहिक सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। नियमित श्रद्धा से यह पूजा मंगल को शुभ फल देने वाला बना देती है, जिससे जीवन की रुकावटें दूर हो जाती हैं।

भात पूजा विवाह योग को मजबूत करती है

जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके विवाह में रुकावट आती है।
भात पूजा से—

  • विवाह के योग सक्रिय होते हैं
  • सही समय पर विवाह का मार्ग खुलता है
  • मांगलिक दोष का प्रभाव कम होता है

भात पूजा कब करवाई जाती है?

भात पूजा विशेष रूप से इन परिस्थितियों में करवाई जाती है—

  • विवाह से पहले
  • जब विवाह बार-बार टूट रहा हो
  • कुंडली में मंगल दोष हो
  • परिवार में विवाह से जुड़ा तनाव हो
  • मांगलिक लड़की/लड़के के लिए

शुभ दिन

  • मंगलवार (मंगल का दिन)
  • विवाह से कुछ दिन पहले
  • गुरु या शुक्र के शुभ गोचर में

6. भात पूजा करने से मिलने वाले प्रमुख लाभ कौन-कौन से है?

  • मंगल दोष में कमी
  • रिश्तों में मधुरता आती है।
  • विवाह में बाधा दूर होती है।
  • दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है।
  • क्रोध और उग्रता कम होती है।
  • स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
  • पितृ दोष या अन्य ग्रह बाधाएं भी शांत होती हैं।

क्या भात पूजा सभी को करनी चाहिए?

भात पूजा अनिवार्य नहीं है, लेकिन—

  • यदि कुंडली में मंगल दोष हो
  • विवाह में लगातार समस्या आ रही हो
  • मातृ पक्ष से जुड़े तनाव हों

8. भात पूजा क्यों केवल परंपरा नहीं, बल्कि ज्योतिषीय उपाय है?

अक्सर लोग भात पूजा को केवल सामाजिक परंपरा समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में—

  • यह मंगल ग्रह शांति का गुप्त उपाय है
  • यह रक्त संबंधों की ऊर्जा को संतुलित करती है
  • यह विवाह और दांपत्य जीवन को सुरक्षित करती है

उज्जैन में भात पूजा और मंगल दोष पूजा कैसे कराएँ?

मंगल दोष कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक ज्योतिषीय स्थिति है। भात पूजा इसका सबसे सरल और शक्तिशाली समाधान है। अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है, तो विवाह से पहले यह पूजा जरूर करवाएं। यह पूजा दोष को शांत करती है और जीवन में शांति व समृद्धि का रास्ता खोलती है।

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