भात पूजा कब और किसे करानी चाहिए? कुंडली के संकेत जानें
शादी की बात चल रही हो और कुंडली में मंगल दोष निकला हो, तो पंडित जी अक्सर भात पूजा की सलाह देते हैं। लेकिन असली सवाल ये है – भात पूजा कब और किसे करानी चाहिए (Bhat Puja Kab Aur Kise Karani Chahiye)? हर मांगलिक को करानी होती है या सिर्फ कुछ स्थितियों में? इस पोस्ट में हम वही साफ-साफ समझा रहे हैं, ताकि आप बिना डर और बिना जल्दबाजी के सही फैसला ले सकें।
भात पूजा किसे करानी चाहिए? कुंडली के ये संकेत देखें
पहले सीधी बात – भात पूजा हर उस व्यक्ति के लिए नहीं होती जिसकी कुंडली में मंगल का नाम आ गया। पूजा तब कराई जाती है जब कुंडली में मंगल दोष वाकई बन रहा हो। ज्योतिषी कुंडली देखकर ये बताते हैं कि पूजा जरूरी है या नहीं। आम तौर पर ये संकेत देखे जाते हैं:
- कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में मंगल बैठा हो – यही मांगलिक दोष की मुख्य स्थितियां हैं
- मंगल उच्च या नीच की स्थिति में हो – दोनों हालत में असर अलग होता है, इसलिए उच्च मंगल दोष की पूजा और निम्न मंगल की विधि में फर्क रहता है
- मंगल की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो और शादी में देरी या रुकावट आ रही हो
- रिश्ते बनते-बनते टूट रहे हों या शादी के बाद अनबन की आशंका दिख रही हो
- किसी ज्योतिषी ने कुंडली देखकर सीधे भात पूजा कराने को कहा हो
अगर आपने अभी तक कुंडली जांची ही नहीं है, तो पहले यह पढ़ें – कुंडली में मंगल दोष कैसे पहचानें। बिना जांच के सिर्फ डर के कारण पूजा कराने की जरूरत नहीं है।
भात पूजा कब करानी चाहिए?
समय की दृष्टि से तीन बातें मायने रखती हैं:
1. शादी से पहले। भात पूजा का मकसद ही विवाह से पहले दोष की शांति है, इसलिए यह पूजा शादी तय होने के बाद और विवाह से पहले कराई जाती है। शादी की तारीख पास आ गई हो तो और देर न करें – कई लोग रिश्ता पक्का होते ही पूजा करा लेते हैं ताकि बाद की रस्मों में जल्दबाजी न रहे।
2. शुभ दिन और मुहूर्त। मंगलवार को मंगल का दिन माना जाता है, इसलिए कई लोग मंगलवार को पूजा कराना पसंद करते हैं। फिर भी सही तिथि और समय पंडित जी कुंडली और पंचांग देखकर तय करते हैं। अपने मन से तारीख तय करने के बजाय एक बार पंडित जी से पूछ लेना बेहतर है।
3. उम्र की बात। कुछ लोग कहते हैं 28 साल के बाद मंगल दोष का असर कम हो जाता है। इस मान्यता पर हम पहले लिख चुके हैं – 28 वर्ष के बाद मंगल दोष का प्रभाव। इसीलिए उम्र देखकर भी पंडित जी सलाह बदल सकते हैं।
भात पूजा कहां और कैसे होती है?
मंगल दोष की शांति के लिए उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर सबसे प्रसिद्ध स्थान है – उज्जैन को मंगल ग्रह की जन्मभूमि माना जाता है। यहीं भात पूजा पूरी विधि से होती है: संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना, मंगल की विधिवत पूजा, भात का भोग और हवन। जो लोग उज्जैन नहीं आ सकते, उनके लिए वीडियो कॉल के जरिए ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था भी होती है। तारीख और विधि की जानकारी के लिए मंगलनाथ भात पूजा की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।
खर्चा कितना लगता है?
भात पूजा का खर्चा सामान्य तौर पर 2100 से शुरू होता है। असली रकम पूजा की विधि, सामग्री और दक्षिणा पर निर्भर करती है, इसलिए सही जानकारी बुकिंग से पहले पंडित जी से ही मिलेगी। हमारी सलाह – पहले अपनी कुंडली दिखाएं, फिर पूजा की जरूरत और खर्च दोनों साफ करके ही आगे बढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हर मांगलिक को भात पूजा करानी चाहिए?
नहीं। मांगलिक दोष होना और पूजा की जरूरत होना दो अलग बातें हैं। दोष कितना बलवान है, किस भाव में है और कुंडली में भंग के योग हैं या नहीं – ये सब देखकर पंडित जी बताते हैं। कई लोगों को पूजा की जरूरत नहीं होती।
क्या भात पूजा ऑनलाइन हो सकती है?
हां। हम वीडियो कॉल के जरिए ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था करते हैं। आप अपने घर से जुड़ सकते हैं, विधि और समय पहले से बता दिया जाता है।
भात पूजा में कितना समय लगता है?
यह पूजा की विधि पर निर्भर करता है। सामान्यतः कुछ घंटों की विधि होती है। तय समय पंडित जी बुकिंग के समय बता देते हैं।
शादी से कितने दिन पहले पूजा करानी चाहिए?
जितनी जल्दी शादी तय हो, उतनी जल्दी कुंडली दिखाकर पूजा की तारीख निकाल लेना ठीक रहता है। ऐसा नहीं है कि विवाह से कुछ खास दिन पहले ही होनी चाहिए – सही मुहूर्त पंडित जी बताते हैं।







